Pages

Sunday, 22 May 2016

दिल में जो भी बात हो एक दिन जुबां पे आ ही जाती है

दिल में जो भी बात हो एक दिन जुबां पे आ ही जाती है
आज नहीँ तो कल हकीक़त बयां हो ही जाती है।
बनी रहती हैं उम्मीदें अपनों के मन में सदा
लेकिन बहुत ज्यादा उम्मीदें जल्दी टूट भी जाती हैं ।
बिन मौसम बरसात ऐसा सुना था मैंने
अब तो तपती दोपहरी में भी बरसात हो जाती है ।
पीने को साफ पानी नहीँ ना साँस लेने को हवा
ना जाने क्या है जो लोगों को शहरी बना जाती है ।
पीठ पीछे बुराई करते नज़र आते हैं लोग सड़कों पर
पर ये बुराई ईमानदार का हौसला और बढ़ा जाती है ।

माँ बाप अँधेरे में जिंदगी बिता रहें हैं

माँ बाप अँधेरे में जिंदगी बिता रहें हैं
साहब आई फोन लिये उड़े जा रहें हैं ।
पढाई लिखाई तो बस एक बहाना है
नेतागीरी सीखकर जनता को बेवकूफ बनाना है ।
आज कल सबसे बड़ा पेशा बन गया है
नेता बनकर भाषण देना, बाबा बनकर प्रवचन देना।
आत्ममुग्धता और आत्मविश्वास की हद तो देखिये
मिली हैं तीन सीटें, और कहते थे की हमीं राजा बनेंगे।
कुछ तो खास है दीदी में और अम्मा में
बंगाली और मद्रासी इन्हे ताज पहना ही देते हैं ।
सरकार कोई भी हो, क्या फर्क पड़ता है
जो कल सड़क पे सोता था वो आज़ भी वहीँ सोता है ।
छोड़ो यार जाने भी दो ये राजनीति की बातें
औकात चवन्नी है , इससे ज्यादा दाल रोटी ज़रूरी है ।

Saturday, 14 May 2016

राहत कभी ना कभी तो मिल ही जायेगी

राहत कभी ना कभी तो मिल ही जायेगी
पर सिर्फ़ सोचने से तक़लीफ़ दूर नहीँ होती
रौशन रहता है चिराग ईमानदार के घर में सदा
लूटमार करने वालों के घर कभी बरकत नहीँ होती
रहता है जज्बा जिसमे कुछ कर गुजरने का
ऐसे लोगों से उनकी मंजिल कभी दूर नहीँ होती
मन की सुंदरता से ही जग सुंदर होता है
सिर्फ़ तन की सुंदरता से ही खुशहाली नहीँ होती
जीवन में उड़ान भरना है तो मेहनत के पंख लगाने होंगे
सिर्फ़ सपनो में उड़ने से कामयाबी नहीँ मिलती
संदीप दुबे

ख्वाबों का शहर है

ख्वाबों का शहर है , ख्यालों का शहर है
दौलत के भूखे रईसजादों का शहर है ।
उम्मीदों का शहर है , आशाओं का शहर है
पर हकीक़त में ख्याली पुलावों का शहर है ।
दहशत का शहर है, गुनाहों का शहर है
जुल्म सहते अनगिनत बेगुनाहों का शहर है ।
भवनों का शहर है , महलों का शहर है
ज़माने के दौलतमंद अमीरों का शहर है ।
गंदगी का शहर है , गंदे नालों का शहर है
फिजा में फैली जहरीली हवाओं का शहर है ।
शौहरत का शहर है , दौलत का शहर है
लेकिन महँगाई से मरने वाले गरीबों का शहर है ।
संदीप दुबे